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 17:34 | 22/Sep/2008 | 1 Comment(s)
Neta ( Lieder

नेता सब मस्त है कुर्सी मे पस्त है
जति बाद छेत्र बाद
उनका ये नारा है
जनता बोले तो ईश् ही सहारा है
बनीरहे कुर्सी , बचा रहु मै
अर्ज़ ये हमारे है
जनता बोले तो , ईश् ही सहारा है
भाई कोई मेरी सुनो
मएने क्या गलत किया
अपना पेट भर लिया
पाच साल के लिए
ये कुरशी मिनिस्टर की
खाए जाओ खाए जाओ
जय हो प्रजातंत्र की
जन्म सीधः अधिकार है
सोसन और भासन्
हो कोई एम . एल. ए. कोई सांसद
जनता है भोली, नेता की खुली झोली
बोट दो बोट दो अर्ज़ ये हमारा है
जनता बोले तो ईश् ही सहारा है


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 12:30 | 21/Sep/2008 | 0 Comment(s)
defrence in our self ( ALGAVBAD )

उठो हुई अब सुबह मेरे प्रिय

कुछ तो कर के दिखलाओ

आए हो इस दुनिया मे जब

नया समाज बनाओ



नही जगे तो क्या होगा

इसके बारे मे सोचो

कहा चले जा रहे आज हम

रुको और रूक कर देखो

कुछ तो सोचो कुछ तो देखो

आखिर क्या हो रहा यहा

छेर्तबाद है कही काही पर जाती बाद

बध रहा यहा

कब तक सोअओगे अब जागो

याद करो बीते दिंन को

कुछ तो सोचो कुछ तो देखो

आखिर हम जा रहे कहा



क्या भारत मे भारत् वासी

को र्ह्णे का अधिकार नही

हम गरीब है तो क्या ह्म्को

जीने का अधिकार नही

रुको ज्रा सुन लो बातो को

कब तक चुप यूँ बएथोगे

मन टटोल लोगेकुद का

तब सचाई समझोगे



हिंसा करना अगर बुरा है

तो सहना है और बुरा

रुको नही अब बहुत हो गया

दिखलाद्ो अपने पोरुष को



भारत एक , एक है हम सब

धरम नही आड़े आएगा

जाती भले हो अलग अलग पर

अपना ही काम आएगा



याद करो बीती बातो को

पाने पलतो इतिहासो का

आपस मे मिल जुल कर रहना

तब तुम सही सांज पाओगे

नाहे मिल सके आपसा मे

तो टूट फुट कर गिर जाओगे



अलग हुए थे जब हम पहले

अंग्रेज़ो ने राज किया

अपने ही घर मे सोचो

हम को कितना ब्रर् बाद किया



क्यूँ दोहराते है हम सब

क्या अब तक नही सीख पाए है

रुको जरा रूक कर सोचो जो

अब तक नही उबर पाए है

धरम अलग है जाती अलग है

भाषा और परदेश अलग है

फिर भी देश एक है अपना

एक हमारी माता है

एक पिता हम सब को होते

नही समझ मे आता है

उठो और जय घोष करो प्रिया

खत्म करो इन दिर्बीचार को

अंग्रेज़ो के जसे कितने घूम रहे है आज यहा

ठहरो और ठहेर अब जाओ

आखिर हम जा रहे कहा









राकेश राय











Permalink 
 18:20 | 20/Sep/2008 | 0 Comment(s)
westurn culture Vs Indian culture

सुनो मेरी बातो को भाई

मन की बात बताता हू

अपने पथ से भ्रमित आज हम

राह सही दिखलाता हू



स्वतंत्र आज है हम सब

देश मे भले तन्तर हो आपना

फिर भी जकड़ रखा है हमको

अंग्रजियत( इंग्लीश कल्चर ) का सपना



मा हो गई है मोम

पिता अब पाप हो गये

हाय बाय के चकर मे हम

कहा खो गये

आसीरबाद प्रणाम

पौर छुना सब भूले

पासच्यात के चक्कर

मे देखो हम झूले

नमस्कार को तयाग

आज हम हाय हाय कहते हए

माता जी को मोम

पिता को पाप आज कहते है

यूवा बर्ग पथ ब्रमित हुए है

लाज का पारिताग किया

पासच्यात ने हमको सोचो

कितना है बर्बाद किया



सुनद्रता की परिभासा अब बदल है देखो

नग्न हुए अब युवा बर्ग

एनके बारे मे सोचो

आज आप को बतला हू

रुको जरा सुन लो बातो को

पहचान अगर है रखनी

अपनी

अपना लो अपनी संस्कृति को राकेश राय

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 17:58 | 16/Sep/2008 | 1 Comment(s)
Sinema

हे सिने जगत के लोगो

रूक जाओ थोड़ा सोचो

क्यू दिखलातो हो ए

सब तो नही देखसकते हम

क्यूँ करतो हो नग्न नाच

हम नही नाच सकते

साहित्य जगत का दर्पण है

जो सही मार्ग दिखलाता है

तुमने सहित्य बनाया है

पर फुहार्पण को लाया है

तुम पर है जिमेदारी

सामाजिक मुल्यो की

राह सही दिखलाने की

नये समाज बनाने की

क्यूँ करते हो अंग प्रदरसन

क्यूँ दिखलात हो खुद को

यूवा बर्ग पथ भ्रमित हो रहे

सबने देखा है खुद को



राकेश राय 09925140027






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 14:41 | 29/Aug/2008 | 1 Comment(s)
JAGAT HAI MITHYA SAR HIN ......

जगत है मिथ्या सार हीन तो फिर क्यू भटक रहहे हम
थोड़ा तो सोचो क्यू प्रपंच मे यू अटक रहे है
सोचो क्या लाया था हमने जो लेकर जयगे
जो मूठी मे बंद किया उसे खोल जाएगे
बाहन स्वजन भवन ये सारे
रुके धरे रह जाएगे
जाएगे हम आप अकेले
सब कुछ यही छोड़ जाएगे
बस यादे रह जाएगी आच्छे और बुरे कर्मो की
नही साथ जाएगा कोई संगी स्वजन और संमंधी
आओ कुछ आयेसा कर जाए याद करे दुनिया सारी आYश पथ को प्रासात करे अपनाए दुनिया सारी

राकेश राय 09925140027

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 12:39 | 30/Jul/2008 | 1 Comment(s)
Kante

फ़ूल और शूल मे बस फर्क़ कहो कितना है फूल और शूल मे बस फर्क़ यही एतना है
फूल खिलते है मुरझा जाते है shul चुभते है, ........ कसते है, ........... याद आते है ,..............//////

राकेश राय

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 11:31 | 26/Jul/2008 | 1 Comment(s)
reallty ( Vastvikta )

अथक योवन के रंग उभार हड़ियो के हिलते कंकाल
केचू के चिकने काले बाल
केचुली केश सीवार
शिसिर सा झर नयनो का नीर
झुलस देता गालो के फूल
प्रणव के चुंबन छोद अधीर
अधर जाते अधोरो को भूल

Permalink 
 16:24 | 9/Jul/2008 | 3 Comment(s)
Beauti of Moon

रात्रि का प्रथम प्रहर



मैं बएथा ( सीट) अपने छ्त पर



कल्पना के सागर मे डूबा देखता चंद्रमा का सॉंदर्या



कितना प्यारा सॉंदर्या कितना प्यारा सॉंदर्या



अजब की छःटा है पयरि ( लव्ली ) गजब की चितवन है नयरीी



लगा कर मूख मे रंगो की रोलिया बहुत डेऱ सारी



मैं सॉंदर्या पान कर देखता टकटकी लगा कर



कितना ............







एन्हि खयालो मे खोया मैं झट से उतरा छत से मै लिया थाला पानी भर कर



मैं तो रहा अवाक हो सुख से विहबल



प्रतिबिंबित हो रहा चंद्रमा ताली के पानी पर



चूम लिया पानी को म चंद्रमा समझ्ः कर



कितना .......................



मेरे प्यारे बंदू बांधो भूल मेरी मत मन पर लाना



मत हसना यह बात समझ कर



गलती मैने कर डाली सॉंदर्या देख कर



कितना ..............................







राकेश राय




पेर्ंालिंक

Permalink 
 15:54 | 9/Jul/2008 | 0 Comment(s)
Beauti OF Moon

रात्रि का प्रथम प्रहर

मैं बएथा ( सीट) अपने छ्त पर

कल्पना के सागर मे डूबा देखता चंद्रमा का सॉंदर्या

कितना प्यारा सॉंदर्या कितना प्यारा सॉंदर्या

अजब की छःटा है पयरि ( लव्ली ) गजब की चितवन है नयरीी

लगा कर मूख मे रंगो की रोलिया बहुत डेऱ सारी

मैं सॉंदर्या पान कर देखता टकटकी लगा कर

कितना ............



एन्हि खयालो मे खोया मैं झट से उतरा छत से मै लिया थाला पानी भर कर

मैं तो रहा अवाक हो सुख से विहबल

प्रतिबिंबित हो रहा चंद्रमा ताली के पानी पर

चूम लिया पानी को म चंद्रमा समझ्ः कर

कितना .......................

मेरे प्यारे बंदू बांधो भूल मेरी मत मन पर लाना

मत हसना यह बात समझ कर

गलती मैने कर डाली सॉंदर्या देख कर

कितना ..............................



राकेश राय

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 12:55 | 5/Jul/2008 | 1 Comment(s)
YE KAY HAI

सावानो ( कुता ) को मिलता दुधा वस्त्रा ( MILK AND CLOTH )

भूखे बालक आकुलाते है //

मा की हाडी से चिपक ठिठुर

जाढ़ो की रात बिताते है //

उवती ( लाड़की ) की लज्जा बसन बेच

जब ब्याज चुकाए ज़ाते है

मालिक तब तेल पुललो ( OIL ) पर

पानी सा द्रव्या ( MONEY ) बहाते है //

सायद आप कुछ समाजे होगे / यह हमारे समाज की बिडंबन

है एक तरफ जहा एक कुत्ता कार मे घहूमता है वही दूसरी तफर एक आदमी के पास रहने के ( रूफ ) भी नही है पर kya करे सायद यही दुनिया है
एसके लिए किसी ने ठीक कहा है



दुनिया बनाने वाले तूने कमी ना की अब किसको क्या मिला ये मूक़ाधार ( किस्मत ) की बात है


राकेश राय

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